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Saturday, 11 March 2017

एक संत क़ी अमूल्य शिक्षा




1.      एक ही सिद्धांत, एक ही इष्ट एक ही मंत्र, एक ही माला, एक ही समय, एक ही आसन, एक ही स्थान हो तो जल्दी सीधी होती है।
2.      कलियुग में कोई अपना उद्दार करना चाहे तो राम तथा कृष्ण क़ी प्रधानता है
3.      औषध से लाभ न तो हो भगवान् को पुकारना चाहिए। एकांत में बैठकर कातर भाव से, रोकर भगवान् से प्रार्थना करें जो काम औषध से नहीं होता, वह प्रार्थना से हो जाता है। मन्त्रों में अनुष्ठान में उतनी शक्ति नहीं है, जितनी शक्ति प्रार्थना में है। प्रार्थना जपसे भी तेज है।
4.      भक्तों के नाम से भगवान् राजी होते हैं। शंकर के मन्दिर में घंटाकर्ण आदि का, राम के मन्दिर में हनुमान, शबरी आदि का नाम लो। शंकर के मन्दिर में रामायण का पाठ करो। राम के मन्दिर में शिव्तान्दाव, शिवमहिम्न: आदि का पाठ करो। वे राजी हो जायेंगे। हनुमानजी को प्रसन्न करना हो उन्हें रामायण सुनाओ। रामायण सुनने से वे बड़े राजी होते हैं।
5.      अपने कल्याण क़ी इच्छा हो तो 'पंचमुखी या वीर हनुमान' क़ी उपासना न करके 'दास हनुमान' क़ी उपासना करनी चाहिए।
6.      किसी कार्यको करें या न करें - इस विषय में निर्णय करना हो तो एक दिन अपने इस्ट का खूब भजन-ध्यान, नामजप, कीर्तन करें। फिर कागज़ क़ी दो पुडिया बनाएं, एक में लिखें 'काम करें' और दूसरी में लिखें 'काम न करें'। फिर किसी बच्चे से कोई एक पुडिया उठ्वायें और उसे खोलकर पढ़ लें।
7.      किंकर्तव्यविमूढ होने क़ी दशा में चुप, शांत हो जाएँ और भगवान् को याद करें तो समाधान मिल जाएगा।
8.      कोई काम करना हो तो मन से भगवान् को देखो। भगवान् प्रसन्न देखें तो वह काम करो और प्रसन्न न देखें तो वह काम मत करो क़ी भगवान् क़ी आगया नहीं है। एक- दो दिन करोगे तो भान होने लगेगा।
9.      विदेशी लोग दवा पर जोर देते हैं, पर हम पथ्यपर जोर देते हैं –
पथ्ये सटी गदार्तस्य किमौषधनिषेवणै:।
पथ्येSसति गदर्त्तस्य किमौषधनिषेवणै:।
'
पथ्य से रहने पर रोगी व्यक्ति को औषध-सेवन से क्या प्रायोजन ? और पथ्य से न रहने पर रोगी व्यक्ति को औषध - सेवन से क्या प्रायोजन ?'
10.   जहाँ तक हो सके, किसी भी रोग में आपरेशन नहीं करना चाहिए। दवाओं से चिकित्सा करनी चाहिए। आपरेशन द्वारा कभी न करायें। जो स्त्री चक्की परमश्रद्धेय स्वामी श्रीरामसुखदासजी

एक संत क़ी अमूल्य शिक्षा




1.      वास्तव में प्रारब्ध से रोग बहुत कम होते हैं, ज्यादा रोग कुपथ्य से अथवा असंयम से होते हैं, कुपथ्य छोड़ दें तो रोग बहुत कम हो जायेंगे। ऐसे ही प्रारभ दुःख बहुत कम होता है, ज्यादा दुःख मूर्खता से, राग-द्वेष से, खाब स्वभाव से होता है।
2.       चिंता से कई रोग होते हैं। कोई रोग हो तो वह चिंता से बढ़ता है। चिंता न करने से रोग जल्दी ठीक होता है। हर दम प्रसन्न रहने से प्राय: रोग नहीं होता, यदी होता भी है तो उसका असर कम पड़ता है।
3.       मन्दिर के भीतर स्थित प्राण-प्रतिष्ठित मूर्ती के दर्शन का जो महात्मय है, वाही महात्मय मन्दिर के शिखर के दर्शन का है।
4.       शिवलिंग पर चढ़ा पदार्थ ही निर्माल्य अर्थात त्याज्य है। जो पदार्थ शिवलिंग पर नहीं चढ़ा वह निर्माल्य नहीं है। द्वादश ज्योतिलिंगों में शिवलिंग पर चढ़ा पदार्थ भी निर्माल्य नहीं है। (निर्माल्य-ग्रहण पाप है)
5.       जिस मूर्ती क़ी प्राणप्रतिष्ठा हुई हो, उसी में सूतक लगता है। अतः उसकी पूजा ब्रह्मण अथवा बहन- बेटी से करानी चाहिए। परन्तु जिस मूर्ती क़ी प्राणप्रतिष्ठा नहीं क़ी गयी हो, उसमें सूतक नहीं लगता। कारण क़ी प्राणप्रतिष्ठा बिना ठाकुरजी गहर के सदस्य क़ी तरह ही है; अतः उनका पूजन सूतक में भी किया जा सकता है।
6.       घर में जो मूर्ती हो, उसका चित्र लेकर अपने पास रखें। कभी बहार जाना पड़े तो उस चित्र क़ी पूजा करें। किसी कारणवश मूर्ती खण्डित हो जाए तो उस अवस्था में भी उस चित्र क़ी ही पूजा करें। 
7.       घर में राखी ठाकुर जी क़ी मूर्ती में प्राणप्रतिष्ठा नहीं करानी चाहिए।
8.       किसी स्त्रोत का महात्मय प्रत्येक बार पढने क़ी जरुरत नहीं। आरम्भ और अंत में एक बार पढ़ लेना चाहिए।
9.       जहाँ तक शंख और घंटे क़ी आवाज क़ी आवाज जाती है, वहां तक पीरोगता, शांति, धार्मिक भाव फैलते है।
10.   कभी मन में अशांति, हलचल हो तो 15-20 मिनट बैठकर राम-नाम का जप करो अथवा 'आगमापायिनोSनित्या:' (गीता 1/14) - इसका जप करो, हलचल मिट जायेगी।
11.   कोई आफत आ जाए तो 10-15 मिनट बैठकर नामजप करो और प्रार्थना करो तो रक्षा हो जायेगी। सच्चे हृदय से क़ी गयी प्रार्थना से तत्काल लाभ होता है।
परमश्रद्धेय स्वामी श्रीरामसुखदासजी

एक संत क़ी अमूल्य शिक्षा




1.      घर में बच्चो से प्रतिदिन घंटा-डेढ घण्टा भगवानाम का कीर्तन करवाओ तो उनकी जरूर सदबुद्धि होगी और दुर्बद्धि दूर होगी।
2.       'गोविन्द गोपाल की जय' - इस मंत्र का उच्चारण करने से संकल्प- विकल्प मिट जाते हैं।, आफत मिट जाती है।
3.       नाम जप से बहुत रक्षा होती है। गोरखपुर में प्रति बारह वर्ष प्लेग आया करता था। भाई जी श्री हनुमानप्रसादजी पोद्दार ने एक वर्ष तक नामजप कराया तो फिर प्लेग नहीं आया।
4.       कोई रात-दिन राम-राम कर्ना शुरु कर दे तो उस्के पास अन्न, जल, वस्त्र आदि की कमी नहीं रहेगी।
5.       प्रहलाद की तरह एक नामजप में लग जाय तो कोई जादू-टोना, व्यभिचार, मूठ आदि काम नहीं करता।
6.       वास्तव में वशीकरण मन्त्र उसी पर चलता है, जिसके भीतर कामना है। जितनी कामना होगी, उतना असर होगा। अगर कोई कामना न हो तो मन्त्र नहीं चल सकता; जैसे पत्थर पर जोंक नहीं लग सकती।
7.       राम्राक्षस्त्रोत, हनुमानचालीसा, सुन्दरकाण्ड का पाठ करने से अनिष्ट मन्त्रों का (मारण-मोहन आदि तांत्रिक प्रयोगों) असर नहीं होता। परन्तु इसमें बलाबल काम करेगा।
8.       भगवान् का जप-कीर्तन करेने से अथवा कर्कोटक, दमयंती, नल और ऋतुपणर्का नाम लेने से कलियुग असर नहीं करता।
9.       कलियुग से बचने के लिये हरेक भाई-बहिन को नल-दमयंती क़ी कथा पढनी चाहिए। नल-दमयंती क़ी कथा पढने से कलियुग का असर नहीं होगा, बुद्द्नी शुद्ध होगी।
10.   छोटे गरीब बच्चों को मिठाई, खिलौना आदि देकर राजी करने से बहुत लाभ होता है और शोक-चिंता मिटते हैं, दुःख दूर होता है। इसमें इतनी शक्ति है क़ी आपका भाग्य बदल सकता है। जिनका ह्रदय कठोर हो, वे यदी छोटे-छोटे गरीब बच्चों को मिठाई खिलायें और उन्हें खाते हुए देखें तो उनका ह्रदय इतना नरम हो जाएगा क़ी एक दिन वे रो पड़ेंगे!
11.   छोटे ब्रह्मण-बालकों को मिठाई, खिलौना आदि मनपसंद वस्तुएं देने से पितर्रदोष मिट जाता है।
12.   कन्याओं को भोजन कराने से शक्ति बहुत प्रसन्न होती है।
परमश्रद्धेय स्वामी श्रीरामसुखदासजी