Tuesday, 30 January 2018

पूजा से जुड़ी हुईं अति महत्वपूर्ण बातें

★ एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए।

★ सोए हुए व्यक्ति का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए। 

★ बड़ों को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ से छूकर प्रणाम करें। 

★ जप करते समय जीभ या होंठ को नहीं हिलाना चाहिए। इसे उपांशु जप कहते हैं। इसका फल सौगुणा फलदायक होता हैं।

★ जप करते समय दाहिने हाथ को कपड़े या गौमुखी से ढककर रखना चाहिए। 

★ जप के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर नेत्रों से लगाना चाहिए।

★ संक्रान्ति, द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, रविवार और सन्ध्या के समय तुलसी तोड़ना निषिद्ध हैं।

★ दीपक से दीपक को नही जलाना चाहिए।

★ यज्ञ, श्राद्ध आदि में काले तिल का प्रयोग करना चाहिए, सफेद तिल का नहीं। 

★ शनिवार को पीपल पर जल चढ़ाना चाहिए। पीपल की सात परिक्रमा करनी चाहिए। परिक्रमा करना श्रेष्ठ है, 

★ कूमड़ा-मतीरा-नारियल आदि को स्त्रियां नहीं तोड़े या चाकू आदि से नहीं काटें। यह उत्तम नही माना गया हैं। 

★ भोजन प्रसाद को लाघंना नहीं चाहिए।

★  देव प्रतिमा देखकर अवश्य प्रणाम करें।

★  किसी को भी कोई वस्तु या दान-दक्षिणा दाहिने हाथ से देना चाहिए।

★  एकादशी, अमावस्या, कृृष्ण चतुर्दशी, पूर्णिमा व्रत तथा श्राद्ध के दिन क्षौर-कर्म (दाढ़ी) नहीं बनाना चाहिए ।

★ बिना यज्ञोपवित या शिखा बंधन के जो भी कार्य, कर्म किया जाता है, वह निष्फल हो जाता हैं।

★ शंकर जी को बिल्वपत्र, विष्णु जी को तुलसी, गणेश जी को दूर्वा, लक्ष्मी जी को कमल प्रिय हैं।

★ शंकर जी को शिवरात्रि के सिवाय कुंुकुम नहीं चढ़ती।

★ शिवजी को कुंद, विष्णु जी को धतूरा, देवी जी  को आक तथा मदार और सूर्य भगवानको तगर के फूल नहीं चढ़ावे।

★ अक्षत देवताओं को तीन बार तथा पितरों को एक बार धोकर चढ़ावंे।

★ नये बिल्व पत्र नहीं मिले तो चढ़ाये हुए बिल्व पत्र धोकर फिर चढ़ाए जा सकते हैं।

★ विष्णु भगवान को चावल गणेश जी  को तुलसी, दुर्गा जी और सूर्य नारायण  को बिल्व पत्र नहीं चढ़ावें।

★ पत्र-पुष्प-फल का मुख नीचे करके नहीं चढ़ावें, जैसे उत्पन्न होते हों वैसे ही चढ़ावें।

★ किंतु बिल्वपत्र उलटा करके डंडी तोड़कर शंकर पर चढ़ावें। 

★पान की डंडी का अग्रभाग तोड़कर चढ़ावें।

★ सड़ा हुआ पान या पुष्प नहीं चढ़ावे।

★ गणेश को तुलसी भाद्र शुक्ल चतुर्थी को चढ़ती हैं।

★ पांच रात्रि तक कमल का फूल बासी नहीं होता है।

★ दस रात्रि तक तुलसी पत्र बासी नहीं होते हैं।

★ सभी धार्मिक कार्यो में पत्नी को दाहिने भाग में बिठाकर धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न करनी चाहिए।

★ पूजन करनेवाला ललाट पर तिलक लगाकर ही पूजा करें।

★ पूर्वाभिमुख बैठकर अपने बांयी ओर घंटा, धूप तथा दाहिनी ओर शंख, जलपात्र एवं पूजन सामग्री रखें।

★ घी का दीपक अपने बांयी ओर तथा देवता को दाहिने ओर रखें एवं चांवल पर दीपक रखकर प्रज्वलित करें। 

आप सभी को निवेदन है अगर हो सके तो और लोगों को भी आप इन महत्वपूर्ण बातों से अवगत करा सकते हैं

Saturday, 20 January 2018

शकुन

  • घर से ऑफिस के लिए जैसे ही निकला - सामने से एक महिला पानी से भरी बाल्टी ले के आ रही थी - मन में सोचा - कितना अच्छा शकुन है = आज का दिन बहुत अच्छा रहेगा -= ऑफिस आकर - आज " शकुन शास्त्र " पर ही चर्चा
  •  पुरे विश्व में प्राचीन काल से " शकुन - अपशकुन " को माना जाता है = यात्रा के समय इसका विशेष महत्व है
  •  " मुहूर्त चिंतामणि " = " मुहूर्त पारिजात " आदि ग्रंथो में इसकी पूर्ण विवेचना है = " रामायण " - " महाभारत " में भी शकुनो के वारे में लिखा है
  •  पुराने समय में जब भी कोई दूर यात्रा पर जाता था - तो पहले से ये व्यवस्था  कर ली जाती थी - कि जब भी यात्रा करने वाला व्यक्ति घर निकले - एक सुंदर महिला सामने से पानी से भरा हुआ घड़ा ले कर आवे = इससे यात्रा शुभ फलदायक होती थी
  •  " अभिजित मुहूर्त " में सभी दिशाओ की यात्रा शुभ फलदायक होती है
  •  जब आप यात्रा के लिए घर से निकले - अगर सामने से - कोई जल से भरा घड़ा , बाल्टी लावे = दूध , दही से भरा कोई भी पात्र लावे = सब्जी से भरा ठेला आवे = सुंदर वस्त्र धारण किये कोई स्त्री या पुरुष दिखाई दे = तो शुभ शकुन होता है
  •  यात्रा के समय " शवयात्रा " दिखाई दे - तो अवश्य नमन करे - ये एक अत्यंत शुभ शकुन है
  •  यात्रा के समय - प्रेस किये हुए कपड़ो सहित धोबी = बंधा हुआ पशु = पुत्र सहित स्त्री = सफ़ेद फुल - दिखाई देना शुभ शकुन है
  •  एक " वेश्या " की भले ही हमारे समाज में इज्जत न हो - लेकिन यात्रा के समय इसका दिखाई देना उत्तम शुभ शकुन है
  •  यात्रा के लिए निकलते ही अगर कान में = धार्मिक गीतों की ध्वनि या मंदिर के घंटे की ध्वनि = सुनाई दे - तो ये भी एक शुभ शकुन है 

Friday, 19 January 2018

Malpua

Ingredients

  • 500ml Milk
  • 3 to 4 tbsp Plain flour
  • 1/2 cup Sugar
  • 1/2 cup Water
  • 300ml Oil for deep frying
  • ½ tsp Cardamom powder
  • few Saffron strands
Method
(1) Boil 500 ml of milk in a heavy bottomed vessel on a low flame. Keep stirring for about 20 to 30 minutes till the milk gets thicker and reduces to 3/4th of its quantity.
(2) In the meantime make sugar syrup by boiling sugar, cardamom and water. You can dissolve a few saffron strands in a small quantity of warm milk and add it in the sugar syrup anytime.
(3) Allow the thickened milk to cool. Add 4 tbsp of plain flour and whisk generously to make a lump-free batter.
(4) Take oil in a flat bottomed frying pan and heat it.
(5) Carefully spread a ladle full of batter in oil to make a small pancake. Fry on medium or low flame. Turn it gently and fry on the other side till it is crisp brown from all sides. [If you find the batter separating out, add very little flour to thicken it and try again. Or if the batter is too thick add some milk. Keep trying with little batter till you are sure that the batter doesn’t separate out when you pour.]
(6) Remove the pancake from oil and dip it in sugar syrup (warm) for a minute and then drain it in a colander.
(7) Repeat the procedure for the rest of the batter.

Thursday, 18 January 2018

तिथि अनुसार आहार-विहार

तिथि अनुसार आहार-विहार... ( शास्त्रवचन )

प्रतिपदा को कूष्माण्ड(कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है।

द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है।

तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है।

चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है।

पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।

षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है।

सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है था शरीर का नाश होता है।

अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है।

नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है।

एकादशी को शिम्बी(सेम), 

द्वादशी को पूतिका(पोई) अथवा 

त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है।

(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

अमावस्या, पूर्णिमा, संक्रान्ति, चतुर्दशी और अष्टमी तिथि, रविवार, श्राद्ध और व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।

(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)

रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए।

(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)

सूर्यास्त के बाद कोई भी तिलयुक्त पदार्थ नहीं खाना चाहिए।

(मनु स्मृतिः 4.75)

लक्ष्मी की इच्छा रखने वाले को रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए। यह नरक की प्राप्ति कराने वाला है।

(महाभारतः अनु. 104.93)

दूध के साथ नमक, दही, लहसुन, मूली, गुड़, तिल, नींबू, केला, पपीता आदि सभी प्रकार के फल, आइसक्रीम, तुलसी व अदरक का सेवन नहीं करना चाहिए। यह विरूद्ध आहार है।

दूध पीने के 2 घंटे पहले व बाद के अंतराल तक भोजन न करें। बुखार में दूध पीना साँप के जहर के समान है।

काटकर देर तक रखे हुए फल तथा कच्चे फल जैसे कि आम, अमरूद, पपीता आदि न खायें। फल भोजन के पहले खायें। रात को फल नहीं खाने चाहिए।

एक बार पकाया हुआ भोजन दुबारा गर्म करके खाने से शरीर में गाँठें बनती हैं, जिससे टयूमर की बीमारी हो सकती है।

अभक्ष्य-भक्षण करने (न खाने योग्य खाने) पर उससे उत्पन्न पाप के विनाश के लिए पाँच दिन तक गोमूत्र, गोमय, दूध, दही तथा घी का आहार करो।

(वसिष्ठ स्मृतिः 370)

पर्स

= मेष,सिंह, और धनु राशि वाले अपना पर्स लाल या नारंगी रंग का रखे. तो लाभ होगा . .
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= वृष,कन्या, और मकर राशि वालों को भूरे रंग का पर्स तथा मटमैले रंग का पर्स बहुत फायदा पंहुचायगा . .
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= मिथुन,तुला, और कुम्भ राशि वाले यदि नीले रंग के पर्स का प्रयोग करते है तो उत्तम मानसिक स्थति के साथ साथ धन के के आगमन के रास्ते भी खुलेंगे . . .
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= कर्क,वृश्चिक, और मीन राशि को सफ़ेद रंग का पर्स उपयोग करना लाभदायक रहेगा. . .
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= रात्री में सोते समय पर्स कभी भी सिरहाने ना रख कर उसे हमेशा अलमारी में रखें. . .
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= पर्स में कभी भी रुपयों के साथ कोई बिल-रसीद या टिकट ना रखे इससे विवाद बढ़ता है . .
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= प्रत्येक जन्म दिवस पर अपने पर्स में एक नोट (छोटा या बड़ा) पर अपने पिता या माता के हाथों से केसर का तिलक लगा कर पूरे वर्ष के लिए रख दे. अगले जन्म दिवस पर किसी कन्या को दें.पुन:माता या पिता से तिलक करवा कर वर्ष हेतु रख ले . .
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= यदि पर्स कभी फट या कट जाय तुरंत बदल दें. यदि कर्ज का ब्याज देना हो तो वह रूपये पर्स में भूल कर भी ना रखे . रखेगे तो कर्ज कभी नहीं उतरेगा. . .