Showing posts with label मुख्य द्वार. Show all posts
Showing posts with label मुख्य द्वार. Show all posts

Thursday, 21 December 2017

मुख्य द्वार

घर के मुख्य द्वार पर मांगलिक चिन्हों जैसे - ऊँ, स्वास्तिक का प्रयोग करना चाहिए . घर में मुख्य द्वार जैसे अन्य द्वार नहीं बनाने चाहिए तथा मुख्य द्वार को फल, पत्र, लता आदि के चित्रों से अलंकृत करना चाहिए . .  मुख्य द्वार पर कभी भी वीभत्स चित्र इत्यादि नहीं लगाने चाहिए . .
 . 
= बैठक कक्ष या ड्राइंग रूम : इस कक्ष में फर्नीचर, शो केस तथा अन्य भारी वस्तुएं दक्षिण-पश्चिम या नैऋत्य में रखनी चाहिए .  इस कक्ष में यदि कृत्रिम पानी का फव्वारा या अक्वेरियम रखना हो तो उसे उत्तर-पूर्व कोण में रखना चाहिए . . टीवी दक्षिण-पश्चिम या अग्नि कोण में रखा जा सकता है . . बैठक में ही मृत पूर्वजों के चित्र दक्षिण या पश्चिमी दीवार पर लगाना चाहिए . . इस कक्ष की दीवारों का हल्का नीला, आसमानी, पीला, क्रीम या हरे रंग का होना उत्तम होता है . . 
 . 
= शयन कक्ष : शयन कक्ष में कभी भी देवी-देवताओं या पूर्वजों के चित्र नहीं लगाने चाहिए . . इस कक्ष में पलंग दक्षिणी दीवारों से सटा होना चाहिए .  सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा में होना चाहिए .  शयन कक्ष में सोते समय पैर दरवाजे की तरफ नहीं होना चाहिए . शयन कक्ष में दर्पण नहीं होना चाहिए, इससे परस्पर कलह होता है . . इस कक्ष की दीवारों का रंग हल्का होना चाहिए . . 
 . 
= रसोईघर : रसोई गृह में भोजन बनाते समय गृहिणी का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए .  बरतन, मसाले, राशन इत्यादि पश्चिम दिशा में रखने चाहिए . .बिजली के उपकरण दक्षिण-पूर्व में रखने चाहिए .  जूठे बरतन तथा चूल्हे की स्लैब अलग होनी चाहिए। रसोईघर में दवाइयां नहीं रखनी चाहिए . .  रसोईघर में काले रंग का प्रयोग नहीं करना चाहिए . . यह हरा, पीला,क्रीम या गुलाबी रंग का हो सकता है . . 
 . 
= पूजाघर : घर में पूजा घर या पूजा का स्थान ईशान कोण में होना चाहिए .  पूजा घर में मूर्तियां या फोटो इस तरह से रखनी चाहिए कि वे आमने-सामने न हों . . मूर्तियां बार अंगुल से अधिक ऊंची नहीं रखना चाहिए . . पूजा गृह शयन कक्ष में नहीं होना चाहिए .  यदि शयनकक्ष में पूजा का स्थान बनाना मजबूरी हो तो वहां पर्दे की व्यवस्था करनी चाहिए . .  पूजा गृह हेतु सफेद, हल्का पीला अथवा हल्का गुलाबी रंग शुभ होता है . . 
 . 
= स्नानगृह तथा शौचालय : स्नानगृह की आंतरिक व्यवस्था में नल को पूर्व या उत्तर की दीवार पर लगाना चाहिए जिससे स्नान के समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा में हो .  स्नान घर में वॉश बेसिन ईशान या पूर्व में रखना चाहिए . . गीजर, स्विच बोर्ड आदि अग्नि कोण में होना चाहिए . . बाथटब इस प्रकार हो कि नहाते समय पैर दक्षिण दिशा में न हों .  बाथरूम की दिवारों या टाइल्स का रंग हल्का नीला, आसमानी, सफेद या गुलाबी होना चाहिए . . शौचालय में व्यवस्था इस प्रकार हो कि शौच में बैठते समय मुख दक्षिण या पश्चिम में हो . .
 .